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आत्म-सुघार से ही सची शांति संभव है
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AJH1960Nov_2
#आत्म
#शांति
#संभव
आत्म-सुघार से ही सची शांति संभव है Document
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Topic Of Source Title
आत्म-बोघ(कविता)
आत्म-सुघार से ही सची शांति संभव है
प्रेरणा श्रद दोहे
गायत्री की सहस्र शक्तियाँ
अध्यात्म-साघना के लिए हिमालय
महानता हमारा जन्मसिद्ध अघिकार है
मानवता के लक्षण
प्रगति के पथ पर बढ़ते ही जाइये
हमारा व्यक्तित्व ओछा न हो
नारी को अविकसित न रखा जाय
हम भी अपना स्वार्थ सिद्ध क्यों न करें
दाम्पत्य जीवन का सुख यों प्राप्त करें
गायत्री उपासना के सत्परिणाम
चटोरापन छोडिये-ब्रह्मचारी बनिये
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